
By Alka
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5 SIP Myths: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान आज करोड़ों भारतीयों के लिए अमीर बनने और वित्तीय लक्ष्य हासिल करने का सबसे पसंदीदा जरिया बन चुका है। अनुशासन के साथ छोटी रकम का निवेश लंबी अवधि में जादुई परिणाम दे सकता है।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि SIP की बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ इससे जुड़े कई मिथक (Myths) भी घर कर गए हैं? ये गलतफहमियां न केवल आपको डरा सकती हैं, बल्कि आपके पोर्टफोलियो को भारी नुकसान भी पहुँचा सकती हैं।
आइए, SIP से जुड़े 5 बड़े मिथकों का पर्दाफाश करते हैं और उनकी सच्चाई जानते हैं।
मिथक: ‘गारंटीड’ और ऊंचा रिटर्न मिलता है
सच्चाई: SIP कोई जादुई छड़ी नहीं है जो रातों-रात पैसा डबल कर दे। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अक्सर इसे ‘जल्दी अमीर बनने’ के तरीके के रूप में पेश करते हैं, जो गलत है।
- हकीकत: असली फायदा बाजार के उतार-चढ़ाव (Volatility) को औसत करने में है।
- ध्यान दें: वास्तविक और ठोस वेल्थ क्रिएशन 7, 10 या 15 साल की लंबी अवधि में दिखता है। यह बाजार के चक्र और आपके द्वारा चुने गए फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
मिथक: जितने ज्यादा टॉप-रेटेड फंड्स, उतना ज्यादा मुनाफा
सच्चाई: कई निवेशक 8-10 अलग-अलग फंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि इससे रिस्क कम होगा, लेकिन इसे ‘ओवर-डायवर्सिफिकेशन’ कहते हैं।
- हकीकत: ज्यादा फंड होने से पोर्टफोलियो जटिल हो जाता है और अक्सर एक ही जैसे शेयरों का दोहराव (Overlap) होने लगता है।
- बेहतर रणनीति: अपनी जरूरतों के हिसाब से 3 से 5 क्वालिटी फंड्स (जैसे लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप और मिड कैप) का चुनाव करें और उन्हें अपने लक्ष्यों (जैसे घर या रिटायरमेंट) से जोड़ें।
मिथक: SIP कभी बंद नहीं की जा सकती (यह एक कानूनी कॉन्ट्रैक्ट है)
सच्चाई: बहुत से लोग सोचते हैं कि एक बार SIP शुरू कर दी तो उसे बंद करना निवेश को बर्बाद करना है।
- हकीकत: SIP कोई कानूनी अनुबंध नहीं है। जीवन में परिस्थितियां बदल सकती हैं—नौकरी जाना, आय कम होना या अचानक कोई इमरजेंसी।
- विकल्प: आज लगभग सभी कंपनियां ‘SIP Pause’ का विकल्प देती हैं, जिससे आप 3-6 महीने के लिए निवेश रोक सकते हैं। इसके अलावा, अगर कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे बंद करके बेहतर फंड में स्विच करना ही समझदारी है।
मिथक: बाजार गिरते ही SIP रोक देना सुरक्षित है
सच्चाई: यह सबसे खतरनाक मिथक है। जब बाजार गिरता है और पोर्टफोलियो लाल दिखता है, तो लोग डरकर SIP बंद कर देते हैं।
- हकीकत: गिरता हुआ बाजार SIP निवेशकों के लिए ‘सेल’ (Sale) की तरह है।
उदाहरण: अगर ₹5000 के निवेश पर ₹100 की NAV से आपको 50 यूनिट मिलती थीं, तो बाजार गिरने पर ₹80 की NAV से आपको 62.5 यूनिट मिलेंगी।
- यही अतिरिक्त यूनिट्स बाजार के संभलने पर आपके रिटर्न को कई गुना बढ़ा देती हैं। गिरते बाजार में निवेश जारी रखना ही “रुपी कॉस्ट एवरेजिंग” का असली लाभ देता है।
मिथक: SIP अपने आप में एक ‘सुरक्षित निवेश प्रोडक्ट’ है
सच्चाई: लोग अक्सर SIP की तुलना बैंक FD से करते हैं, जो सरासर गलत है।
- हकीकत: SIP निवेश का एक तरीका (Method) है, खुद निवेश (Product) नहीं। आपका पैसा अंततः शेयर बाजार या डेट मार्केट में लग रहा है।
- जिम्मेदारी: आपका रिटर्न उस म्यूचुअल फंड की रणनीति, फंड मैनेजर के कौशल और बाजार के जोखिम पर निर्भर करता है। निवेश से पहले फंड की जांच करना अनिवार्य है।
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SIP निवेश का एक बेहतरीन माध्यम है, लेकिन इसके पीछे के विज्ञान को समझना जरूरी है। अफवाहों पर ध्यान न दें और बाजार के उतार-चढ़ाव को अपना दोस्त बनाएं। याद रखें, निवेश में ‘Timing the market’ से ज्यादा जरूरी ‘Time in the market’ है।
डिस्क्लेमरः Herjankari.com अपने पाठकों को सलाह देता है कि यह सामग्री केवल जानकारी के लिए दी गई है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श लें। अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर ही निवेश करें।






