लैंडिंग से पहले मौत का ‘घेरा’: क्या अजित पवार का विमान हादसा महज इत्तेफाक था या कोई गहरी साजिश?

By Alka

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28 जनवरी 2026 की सुबह महाराष्ट्र के लिए एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। राज्य के उपमुख्यमंत्री और ‘पावर हाउस’ कहे जाने वाले नेता अजित पवार का विमान बारामती के रनवे से चंद कदमों की दूरी पर आग का गोला बन गया। लेकिन इस हादसे के जो शुरुआती विवरण सामने आ रहे हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, क्रैश होने से पहले विमान आसमान में काफी देर तक अनियंत्रित होकर गोल-गोल घूमता रहा।

वो आखिरी मिनट: क्या हुआ था आसमान में?

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई विमान लैंडिंग से पहले गोल चक्कर (Holding Pattern) लगाता है, तो इसके दो मुख्य कारण होते हैं: या तो एटीसी (ATC) से लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली, या विमान में कोई तकनीकी खराबी आ गई है।

  • अनियंत्रित रोटेशन: प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विमान सामान्य ‘होल्डिंग पैटर्न’ में नहीं था, बल्कि वह लड़खड़ा रहा था। यह स्थिति अक्सर तब पैदा होती है जब विमान के ‘कंट्रोल सरफेसेज’ (Flaps or Rudder) जाम हो जाएं या इंजन में अचानक आग लग जाए।
  • साजिश की बू? अगर विमान के नेविगेशन सिस्टम या इंजन के साथ कोई छेड़छाड़ (Sabotage) की गई हो, तो पायलट के लिए उसे संभालना असंभव हो जाता है। अजित पवार जैसे वीआईपी की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, यह अब जांच का सबसे बड़ा विषय है।

‘साजिश’ के पीछे के तीन बड़े सवाल

राजनीतिक गलियारों में इस हादसे को लेकर ‘षड्यंत्र’ की थ्योरी इसलिए तेज है क्योंकि अजित पवार महाराष्ट्र की सत्ता के सबसे महत्वपूर्ण धुरी थे।

  • मेंटेनेंस में चूक या कुछ और? जिस लियरजेट 45 (VT-SSK) विमान का उपयोग किया गया, वह पहले भी एक बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका था। क्या जानबूझकर एक ‘असुरक्षित’ विमान का चयन किया गया?
  • राजनीतिक टाइमिंग: राज्य में चुनाव करीब हैं और अजित पवार कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसलों के केंद्र में थे। उनके हटने से किसे सबसे ज्यादा राजनीतिक फायदा होगा? यह सवाल जांच एजेंसियों के रडार पर जरूर होगा।
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन: उपमुख्यमंत्री स्तर के नेता के विमान की उड़ान से पहले गहन जांच (Pre-flight Inspection) होती है। क्या उस जांच में कुछ नजरअंदाज किया गया?

‘ब्लैक बॉक्स’ खोलेगा राज

विमान का ब्लैक बॉक्स (Flight Data Recorder) अब सबसे अहम सबूत है। वह बताएगा कि क्या पायलट ने क्रैश से पहले कोई ‘मेडे’ (Emergency) कॉल किया था या विमान के सिस्टम ने अचानक काम करना बंद कर दिया था। यदि इंजन में खराबी पहले से थी, तो विमान को उड़ान की अनुमति किसने दी?

महाराष्ट्र की राजनीति पर प्रभाव

अजित पवार के जाने से महायुति सरकार ने अपना सबसे अनुभवी ‘ट्रबलशूटर’ खो दिया है। यदि जांच में ‘साजिश’ का एक भी अंश मिलता है, तो राज्य में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता का संकट खड़ा हो सकता है। उनके समर्थक और कार्यकर्ता पहले से ही आक्रोशित हैं, और किसी भी प्रकार की लापरवाही की पुष्टि महाराष्ट्र में जनाक्रोश को भड़का सकती है।

निष्कर्ष: सच का सामने आना जरूरी है

अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, वे लाखों लोगों की उम्मीदों का चेहरा थे। उनके विमान का लैंडिंग से पहले ‘मौत का घेरा’ बनाना एक सामान्य तकनीकी खराबी हो सकती है, लेकिन जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां हैं, ‘साजिश’ की आशंका को सिरे से नकारा नहीं जा सकता। डीजीसीए (DGCA) और उच्च स्तरीय जांच समितियों को अब दूध का दूध और पानी का पानी करना होगा।

Alka

Alka Tiwari is a seasoned author with over 10 years of experience writing for women. Her work focuses on empowerment and personal growth, delivering inspiring and relatable stories that resonate deeply. Alka is dedicated to uplifting and connecting with her readers.

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